Dr Pratibha Singh
. India . joined April, 2021

Describe Your Self

 

GENERAL TRAITS - Simple down to earth person, who wish to cherish each moment of life. I am highly devoted to a task assigned to me by different phases of life, whether its role of daughter, student, wife mother of two daughters and list goes on. Straight forward, optimist, sensitive, trustworthy, family-oriented person.

SPECIAL TRAITS-Adventurous, exploring (love to explore new things, whatever comes my way, either new place, new people, new opportunity etc), Determined person, Non-judgmental, experimental, Introwort but extrovert later if comfortable

HOBBIES- Reading, Poetry, Photography, Travelling

LIKES- Adrakh waali chai anytime, listening music (Mohammad Rafi Saab, Mahindra Kapoor, Lata Mangeshkar ji and Jagjit Singh Ji, Astrology

PROFESSION-TEACHING

IDEAL PERSON – SIR APJ ABDUL KALAM

INSPIRATION-Self motivated

ROLE MODEL IN LIFE- No one

FAVOURITE FOOD - –Vegetarian person , Punjabi food , Daal Baati Choorma  and saag with makki roti and chhaach.

FAVOURITE OUTFIT- depends upon occasion (and off course mood also)

FAVOURITE PLACE TO VISIT -Rajasthan

FAVOURITE COLOR-All shades of purple and blue

IDEAL PLACE TO RELAX- Any open place with greenery

STRESS BUSTER- Yoga, workout and novels

FAVOURITE QUOTE- अंजाम उसपे छोड़ दे आगाज करके देख,

                                      भीगे हुए परों से भी परवाज़ करके देख II

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    • City :
    • Mumbai

    • State :
    • Maharashtra

    • Email ID:
    • drpratibhasingh@gmail.com

    • Profession:
    • TEACHING

    • Education:
    • Ph.D.

    • Category:
    • 36-50

Physical Attribute

    • Bust :
    • 34

    • Waist :
    • 29

    • Hip:
    • 40

    • Dress Size:
    • Biba S, jockey MEDIUM, (Small to Medium)

    • Shoes Size:
    • 8

    • Height (ft):
    • 5 ft  3 inch

    • Weight:
    • 55 Kg

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Achievements

1.I consider my education as my foremost acheivement-
Double M.Sc. (ENVIRONMENTAL SCIENCES,BOTANY)
Ph.D
Double NET
B .Ed.
Awardee of CSIR - Senior Research Fellowship.

2.Author of Book "ENVIRONMENTAL STUDIES"for graduation level students.

3.Self written POETRY book going to get published soon.

4.Awarded with zonal and regional level certificates for supervising students in Science related projects. 

5. I consider both of my daughters as my next Acheivement /asset of my life .

6.Inspite of fluctuations in life, like postings, kids, studies, job,relations etc, I could make balance between all these.

ज़िन्दगी

सावन की पहली  बारिश, फागुन की खुली  धूप ,
हरियाली सी सुन्दर , या  भूकम्प  सी कुरूप I
चिड़ियों का कलरव ,  बद्जुबां सी कोई गाली, 
कभी दुःख की छाया,कभी उमंगें दुल्हन वाली I
मंदिर की बजती घंटी, या मस्जिद की अजान, 
हर कदम एक जंग,   हौंसलों   की   उड़ान I
                               तुझे कोई एक  पहचान क्या दूँ?
                               ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ?..

यादों के गलियारे में  , खुलता कोई झरोखा,
जीवन का यथार्थ या , उम्मीदों का धोखा I
खिड़की से  झांकती ,  आशाओं की धुप ,
कभी गमगीन -कभी सलोना,तेरा रंग रूप I
तेरे हर पल को   ,  मेहनत से संजोया है
बड़ी मशक्कत से इसे, इक लय  में पिरोया है
                              तुही बता अब  इसके दाम क्या दूँ?
                              ज़िन्दगी , मैं    तुझे नाम क्या दूँ?..

आता और  जाता  ये  ,  लोगों का मेला है,
भीड़  हर  कहीं  ,   पर हर कोई अकेला है,
सवालों और जवाबो का - उलझा सा फ़लसफ़ा 
कभी  तपती  मरुस्थल ,  कभी कहकशां
मिलन का उल्लास  ,कभी बिछुड़ने की उदासी
कभी झरने सी हंसी..  कभी- कभी रुआंसी
                                हंसी पे ही ठहर जाए,वो विराम क्या दूँ?
                                ज़िन्दगी, मैं    तुझे  नाम  क्या दूँ?..

हर सांस से उम्मीद , हर रिश्ते में   फ़रमाईश,
अज़ब सी  कश्मकश, हर कदम पे  आज़माईश
कभी खुद को गुलशन, कभी सहरा में पाया है
कभी लगे जिंदगी,   एक ठहरा सा साया हैI
साँसों को जीने की एक छोटी सी कवायद लगे.
कभी इन सांसो से, खुद को ही शिकायत लगे,
                                   सुकून से भरा कोई आराम क्या दूँ?..
                                   ज़िन्दगी ,मैं    तुझे नाम क्या दूँ?..

.महफ़िल में हँसे कभी, तन्हाई में रो लिए.
जिस राह ले चली  ,हम उसी पे हो लिएI
कभी तुझमें दिखी मुझे , करीब की सहेली,
कभी बनी अनजान तू, अबूझ सी पहेली I
कभी फिसलती जिंदगी ,कभी सँवरती जिंदगी,
नन्हे नन्हे लम्हे इसके ,पलकों में पो लिए
                                     सम्हाले जो लम्हों को,वो सामान क्या दूँ?,
                                     ज़िन्दगी ,मैं  तुझे   नाम क्या दूँ?..

बच्चे की मुस्कराहट में,  चूड़ी की खनखनाहट में,
कभी शांत समुन्दर ,कभी बादल  की गड़गड़ाहट  में,
कहीं दुःख की चादर ,  कहीं सुख की शहनाई,
उजियारा करते दिए कहीं ,बल्बों की जगमगाहट में 
अतीत की जद्दोजहद,  भविष्यों की योजना,
रोज सुबह उठके,      वर्तमान को सींचना I
                                 इक तेरी परिभाषा,तुझे परिमाण क्या दूँ?,
                                 ज़िन्दगी ,मैं तुझे नाम क्या दूँ?

कभी शीशे सी  साफ़,  कभी लगे अस्पष्ट है
निरंतर सब दौड़ते ,   पर हर कोई अतृप्त हैI 
कभी हंसती ,कभी रोती, कभी बड़ी, कभी छोटी,
गंगा  सी पावन कभी ,कभी कीचड सी खोटी I
हर वक़्त हर हालात में, तुझे निहारते रहे,
 कभी तनहा ,कभी संग ,तुझे संवारते रहे
                                     इससे बड़ा अब कोई सम्मान क्या दूँ?
                                     ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ..

 जिंदगी तुझे काश , खुलकर  जियूँ   कभी,
 तेरी हर बूँद को,     खुल कर  पियूं  कभी I
 बाहर से ख़ामोशी ,विचारों में  अंतरदुन्द है,
 कभी कसमसाहट  ,कभी लगे   स्वछंद है I
 अनमोल है तू फिर भी,तेरी कीमत जानती हूँ,
 खुदा का सुन्दर तोहफा, मैं ये भी मानती हूँ i
                                  जिंदादिली को तेरी सलाम क्या दूँ?
                                  ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ?.... मैं तुझे .नाम क्या दूँ?.....मैं तुझे नाम क्या दूँ….....

              डा. प्रतिभा सिंह..

 

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